रजिस्ट्रेशन नं. : 48

पत्रावली संख्या : 14110D

फ़ोन : 9837218260

9410101230

उत्तराखंड आत्मज्ञान जन उत्थान समिति पंजीकृत ( उत्तराखंड भारत )

मुख्यालय : माँ सिद्धिदात्री दुर्गा मंदिर श्री घंटाकर्ण धाम , ग्राम : लोगा (चोपड़ धार), पो. ओ. : सकलाना, तहसील जखोली

जनपद : रुद्रप्रयाग (उत्तराखंड), पिन : 246475

शाखा कार्यालय : गोदियाल भवन जखोली ब्लॉक

शाखा कार्यालय : अरण्य विहार सहस्त्रधारा मार्ग देहरादून

AIM OF NGO (हमारा लक्ष्य)संशोधित स्मृति पत्र

1. संस्था का नाम
उत्तराखण्ड आत्म ज्ञान जन उत्थान समिति

2. संस्था का पता
माँ सिद्धि दात्री दुर्गा मन्दिर शक्ति पीठ ग्राम लौंगा, (चोपड़ाधार) पो0ओ0 सकलाना (गोदियाल भवन पो0 जखोली ब्लाक) तहसील जखोली जिला रूद्रप्रयाग।

3. संस्था का कार्यक्षेत्र
सम्पूर्ण भारतवर्ष

संस्था के उद्देश्य

1. आध्यात्मिक ज्ञान द्वारा भारतीय संस्कति का विकास करना।
2. अनाथ, असहाय एवं अतिनिर्धन वर्ग तथा बाल अधिनियम के अन्तर्गत, विचाराधीन बालक/बालिकाओं के सर्वागीण विकास के लिए निःशुल्क प्रारम्भिक, माध्यमिक शिक्षा दिलाने हेतु पाठशाला (स्कूल) विद्यालयों को संचालित कर शिक्षा दिलाना।
3. पर्यावरण के विस्तार हेतु आम जनता को पर्यावरण का महत्व बताकर पर्यावरण के रख-रखाव के लिए जनता को प्रेरित कर वृक्षारोपण कार्यक्रम करवाना, संपूर्ण विश्व में पर्यावरण के विस्तार हेतु हर संभव प्रयास करना।
4. संस्था का उद्देश्य सभी वर्ग के कल्याणर्थ छात्र/छात्राओं के सहायतार्थ शासनिक, प्रशासनिक सहायता के अतिरिक्त स्वतः मिल-जुलकर श्रम दान द्वारा केन्द्रीय शिक्षा (सी0बी0एस0ई0) पाठ्यक्रम द्वारा प्रारम्भिक, माध्यमिक एवम् उच्च शिक्षा दिलाने हेतु स्कूल, विद्यालयों को संचालित कर सभी वर्ग के छात्र/छात्राओं को सर्वोच्च शिक्षा दिलवाकर सर्वागीण विकास करना।
5. संपूर्ण विश्व में मातृ शक्ति को अति महत्वपूर्ण स्थान दिलाना, महिला स्वास्थ्य सेवायें उपलब्ध करना, विधवा एवं अनाश्रित महिलाओं को हर संभव सहायता दिलाना।
6. विकलांग एवं असहाय निर्धन वर्ग के लोगों हेतु चिकित्सा सुविधा स्वास्थ्य सेवायें उपलब्ध करना एवं प्रत्येक गांव, नगर, मौहल्ला शहरों, राज्यों में नेत्र, कान आदि शिविर लगाने का प्रयास करना।
7. महिलाओं को स्वावलम्बी, आत्मनिर्भर बनाने हेतु शिक्षा एवं तकनीकी, सिलाई, कढ़ाई, बुनाई पेटिंग, ब्यूटीशियन, शार्टहैण्ड, टाईपिंग, तकनीकी आदि शिक्षा प्रशिक्षण केन्द्रों को संचालित कर प्रशिक्षण दिलाना।
8. सभी वर्ग के शिक्षित युवक/युवतियों को आत्मनिर्भर जीविकोपार्जन के लिए शिक्षण-प्रशिक्षण, तकनीकी ज्ञान-विज्ञान आदि प्रशिक्षण केन्द्रों को संचालित कर बेरोजगार छात्र/छात्राओं के अभिरूचि विषय के आधार पर प्रशिक्षण देकर आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास करना।
9. प्रशासनिक सहायता के अतिरिक्त स्वतः मिलजुल कर श्रमदान के द्वारा संपूर्ण विश्व को आदर्श स्वरूप प्रदान करना, समाज में राष्ट्र हित के लिए स्वच्छ पर्यावरण एवं शैक्षिक जागृति उत्पन्न करना।
10. जनकल्याण हेतु जड़ी-बूटियों की खोज संग्रह कर प्रचार-प्रसार करना, आदान-प्रदान करना, जड़ी-बूटियों को सर्वाधिक जनकल्याण हेतु अधिक उपयोग बनाना।
11. संपूर्ण विश्व में शिक्षा का प्रचार-प्रसार कर प्रत्येक मानव को साक्षर बनाने का प्रयास करना तथा पत्रिकाओं का साहित्यिक विज्ञापनों के माध्यम से संपूर्ण विश्व में भारतीय संस्कृति का विकास करना एवं आत्मज्ञान जन-जन तक पहुँचाना।
12. वृद्ध, असहाय एवं समाज से तिष्कृत व्यक्तियों के के लिये निःशुल्क आश्रम एवम् भोजन की व्यवस्था करना।
13. अल्पसंख्यक, अति निर्धन, दलित वर्ग के लोगों को आत्मनिर्भर, सवावलम्बी बनाने हेतु गृह लघु उद्योग, कुटीर उद्योग, ग्राम उद्योग की सहायता द्वारा जीविकोपार्जन की व्यवस्था करने का प्रयास करना।
14. देववाणी संस्कृत भाषा के विस्तार एवं भारत की एकता अखण्डता, दृढ़ शक्ति आत्मबल की जागृति के लिये संस्कृत विद्यालयों की स्थापना कर शिक्षा का प्रचार-प्रसार करना।
15. मानसिक पीडित एवं चिन्ताग्रस्त लोगों को योगाभ्यास प्रशिक्षण देकर शारीरिक, मानसिक शक्ति उत्पन्न करना।
16. भारतीय संगीत वाद्य आदि शिक्षा के आधार पर संगीत विद्यालयों को संचालित कर छात्र/छात्राओं को भारतीय संगीत का प्रशिक्षण दिलाना।
17. समाज में फैले निराशावाद को दूर कर लोगों में आशा व उल्साह का संचार कर आम जनता को जागरूक व सशक्त करना।
18. ज्ञान, विज्ञान आम जनता के लिए उपयोगी व सार्थक बनाना।
19. संस्था उद्देश्यों के आधार पर संस्था के कार्य क्षेत्र विस्तार हेतु जगह-जगह संस्था शाखा कार्यालयों की स्थापना कर जन उत्थान हेतु हर संभव कार्य करना।
20. संस्था के उद्देश्यों के अनुरूप शिक्षण-प्रशिक्षण केन्द्र विद्यालयों में शैक्षिक योग्यता-प्रशिक्षण के आधार पर शिक्षित/प्रशिक्षित महिला, युवती/पुरूष एवं युवक वर्गों को वरीयता देना।
21. एड्स जैसे महारोगों की रोकथाम हेतु आम जनता को जागरूक व सशक्त बनाना तथा स्वास्थ्य सेवा परामर्श द्वारा आम जनता को राहत दिलाना।
22. समाज में फैले भ्रष्टाचार को दूर कर निःस्वार्थ भाव से जन उत्थान हेतु कार्य करना।
23. साधनहीन वर्गों तथा ग्रामीण, आदिवासी क्षेत्र के विकास हेतु केन्द्रीय, राज्य, शासनिक-प्रशासनिक सहायता के अतिरिक्त स्वतः मिलजुल कर विकास कार्य करना।
24. हैण्डीक्राफ्ट व हैण्डलूम का प्रशिक्षण देना व हैण्डलूम हैण्डीक्राफ्ट ग्राम शिल्प मेला प्रदर्शनी का आयोजन करना व भाग लेने वाले हस्तशिल्पियों को श्रेष्ठतम कला के लिये पुरस्कृत करना व उन्हें प्रोत्साहित करना।
25. अनाथ, निर्धन एवं अपंग बच्चों के लिए बालसेवा निकेतन संरक्षण गृह तथा बाल सेवा सदनों की स्थापना व संचालन करना।
26. उŸाराखण्ड में पर्यटन विकास हेतु समिति का योगदान रहेगा व पर्यटन विभाग भारत सरकार व केन्द्रीय सरकार द्वारा चलाये गये कार्यक्रमों को संचालित करने में सहयोग रहेगा व उनके सहयोग से पर्यटन योजनाओं को कार्यान्वित करना।
27. संस्था द्वारा नशा मुक्ति उन्मूलन हेतु कार्यक्रम चलाना व केन्द्र सरकार व राज्य सरकार द्वारा चलायी जा रही योजनाओं को समाज हित में संचालित करना।
28. दान, चन्दा, सहायता शुल्क अथवा ऋण आदि श्रोतों से वित्तीय संस्थापना तैयार करना, चल-अचल सम्पत्ति प्राप्त करने व अचल सम्पत्ति के निस्तारण का पूर्ण अधिकार होगा।
29. संस्था द्वारा पर्वतीय एवं ग्रामीण क्षेत्रों से पलायन रोकने हेतु वहाँ की जनता को सभी तरह की मूलभूत सुविधाएँ प्रदान कर एवम् स्वरोजगार देने हेतु प्रयास करना।
30. संस्था द्वारा भारत की एकता अखण्डता को सदैव धर्मनिरपेक्ष भाव से बनाये रखने हेतु एवं पर्यटन के विस्तार हेतु समय-समय पर ऋतुओं के अनुसार मेलों एवं सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन करना।
31. भारत सरकार तथा राज्य सरकार द्वारा लाई गई नई योजनाओं के बारे में ग्रामीण क्षेत्र के लोगों को जागरूक बनाना।
32. संस्थान द्वारा पर्यावरण संरक्षण/जल संरक्षण, पंचायती राज, तथा प्लानटेंशन/वनीकरण तथा ग्रामीण शहरी क्षेत्रों के किसानों से सम्बन्धित मृदा व पानी का तकनीकी शिक्षण-प्रशिक्षण एवं परीक्षण कराना तथा राज्य व केन्द्र सरकार द्वारा चलायी जा रही विकासशील योजनाओं के विकास हेतु तकनीकी एवं शोध के क्षेत्र में यथासम्भव प्रयास करना तथा आवश्यकतानुसार वे सभी कार्य करना जो संस्था के चौमुखी विकास व समाज के हित में हों।
33. भारत सरकार मानव संसाधन विकास मंत्रालय तथा सामाजिक एवं न्याय अधिकारिता मंत्रालय, महिला बाल विकास मंत्रालय एवं भारत सरकार के अधनीस्थ मंत्रालयों द्वारा जन कार्यो एवं आम जनता के सामाजिक, आर्थिक विकास एवं आत्मनिर्भर बनाने हेतु संस्था द्वारा सहयोग लेकर जन विकास कार्यक्रम चलाये जायेंगे।
34. सम्पूर्ण भारत वर्ष में एकता, अखण्डता एवं मानव जाति के सर्वागीण विकास हेतु ब्लाक, जनपद, राज्य स्तर पर संस्था शाखा प्रबन्धकारिणी का गठन कर संस्था के उद्देश्यों अनुसार मान जाति को स्वावलम्बी, आत्मनिर्भर बनाने का प्रयास करना।

संशोधित नियमावली

1. संस्था का नाम उत्तराखण्ड आत्म ज्ञान जन उत्थान समिति
2. संस्था का पता माँ सिद्धि दात्री दुर्गा मन्दिर शक्ति पीठ
ग्राम लौंगा, (चोपड़ाधार) पो0ओ0 सकलाना (गोदियाल भवन पो0 जखोली ब्लाक) तहसील जखोली जिला रूद्रप्रयाग। 3. संस्था का कार्यक्षेत्र सम्पूर्ण भारतवर्ष

4. संस्था की आत्मा एवं प्राणः संस्थापक

5. संस्था की सदस्यता तथा सदस्यों के वर्गः

अ. संस्थापक - ऐसा व्यक्ति जिसके द्वारा संस्था की स्थापना की गयी है वह व्यक्ति संस्था की आत्मा के रूप में सदैव जाना जायेगा तथा संस्था का मुख्य अंग संस्था े अध्यक्ष के रूप में आजीवन संस्था का उत्तराधिकारी रहेगा एवं संस्था के समस्त प्रकार के नीति-निर्धारण करने का पूर्ण अधिकार संस्थापक/अध्यक्ष के पास सुरक्षित रहेगा साथ ही संस्था के समस्त निर्देशों की अनुमति, स्वीकृति विधिवत तभी मान्य मानी जायेगी जब संस्थापक/अध्यक्ष की स्वीकृति प्राप्त हो संस्थापक को संस्था के हित में निर्णय लेन-देन का सर्वाधिकार संस्थापक के पास रहेगा।
ब. संरक्षक - ऐसा व्यक्ति जो संस्था को 10000/- रूपये की धनराशि या इतने मूल्य की सेवा प्रदान करेगा एवं संस्था की प्रगति हेतु समय-समय पर संस्था का मार्गदर्शन करता रहेगा, वह संस्था का संरक्षक होगा।
स. आजीवन सदस्य - जो व्यक्ति 2500/- रूपये व उसके बराबर के मूल्य की चल-अचल सम्पत्ति संस्था को प्रदान करेगा राजनीति से मुक्त होकर संस्था के नियमों में विश्वास करेगा व अपना आवेदन पत्र संस्थापक/अध्यक्ष अथवा सचिव को देकर वह संस्था का आजीवन सदस्य बन सकता है।
द. साधारण सदस्यता - जो व्यक्ति प्रति वर्ष 251/- रूपये या उसके बराबर के मूल्य की चल-अचल सम्पत्ति संस्था को प्रदान करेगा संस्था के नियमों में विश्वास करता है एवम् संस्था की उन्नति के लिए संस्था के कार्यों को करने के लिए तैयार है वह अपना आवेदन पत्र अध्यक्ष या सचिव को देगा। संस्थापक/अध्यक्ष की सहमति से वह व्यक्ति संस्था का साधारण सदस्य बन सकता है।
य. सामान्य सदस्य - जो व्यक्ति प्रतिवर्ष संस्था में 101/- रूपये देगा वह संस्था का सामान्य सदस्य बन सकता है।
र. जो व्यक्ति अपनी स्वेच्छा अनुसार संस्था के कार्यों में सहयोग करेगा वह संस्था का दानवीर सदस्य के रूप में माना जायेगा।

6. सदस्यता की समाप्ति

1. सदस्य की मृत्यु होने पर
2. स्वयं त्याग पत्र देने पर।
3. सदस्यता शुल्क जमा न करने पर
4. पागल या दिवालिया घोषित होने पर।
5. किसी भी न्यायालय द्वारा दोषी या दण्डित होने पर
6. संस्था के विरोधी कार्य करने पर जिससे संस्था की छवि धूमिल होती हो।
7. चार बैठकों में लगातार बिना पूर्व सूचना के अनुपस्थित रहने पर।

संस्था की आत्मा - संस्थापक

संस्था के अंग :
(1) संस्था के मुख्य अंग संस्थापक/अध्यक्ष
(2) साधारण सभा
(3) प्रबन्धक कार्यकारिणी समिति

साधारण सभा

(क) गठनः- संस्था के समस्त प्रकार के सदस्यों को मिलाकर साधारण सभा का गठन होगा।
(ख) बैठकेंः- सामान्य व विशेषः साधारण सभा की सामान्य बैठक वर्ष में एक बार होगी तथा विशेष बैठक आवश्यकतानुसार कभी भी बुलाई जा सकती है।
(ग) सूचना अवधि - साधारण सभा की सामान्य बैठक की सूचना 15 दिन पूर्व तथा विशेष बैठक की सूचना 7 दिन पूर्व लिखित नोटिस जारी करके बुलाई जा सकती है।
(घ) गणपूर्तिः- कुल सदस्यों की 2/3 बहुमत उपस्थिति ही गणपूर्ति मानी जायेगी।
(ड.) विशेष वार्षिक अधिवेशन की तिथिः विशेष वार्षिक अधिवेशन की तिथि का निर्धारण प्रबन्धकारिणी समिति का गठन करना तथा वार्षिक बैठकों में भाग लेना, संस्था के चहुमुखी विकास व उद्देश्यों की पूर्ति हेतु सदैन तन, मन, धन से तत्पर रहना, वार्षिक आय-व्यय का हिसाब पास करना, वार्षिक बजट स्वीकार करना, संस्था का नीति निर्धारण करना।

7. प्रबन्धकारिणी समिति

(क) गठन - प्रबन्धकारिणी समिति का गठन संस्थापक/अध्यक्ष साधारण सभा के द्वारा जिसमें संस्थापक ही आजीवन अध्यक्ष रहेंगे। प्रबन्धकारिणी का गठन साधारण सभा के द्वारा संरक्षक, उपाध्यक्ष 2 सचिव 1, उपसचिव 1, कोषाध्यक्ष, 1 संगठन मंत्री 1 लेखा निरीक्षक 1 प्रचार मंत्री 1, सदस्य 6 होंगे। ख. बैठकें - सामान्य व विशेष प्रबन्धकारिणी की सामान्य बैठक हर दूसरे माह या तीसरे माह में हुआ करेंगी तथा आवश्यकता पड़ने पर 24 घण्टे पूर्व बुलाई जा सकती है।
(ख) बैठकें - सामान्य व विशेष प्रबन्धकारिणी समिति की सामान्य बैठक हर दूसरे माह या तीसरे माह में हुआ करेगी तथा विशेष बैठकें, आवश्यकतानुसार कभी भी बुलाई जा सकती है।
(ग) सूचना अवधि - प्रबन्धकारिणी समिति की सामान्य बैठक की सूचना 7 दिन पूर्व तथा विशेष बैठक की सूचना 24 घंटे पूर्व लिखित नोटिस जारी करके बुलाई जा सकती है।
(घ) गणपूर्तिः- कुल सदस्यों के 2/3 बहुमत ही गणपूर्ति उपस्थिति मानी जायेगी।
(ड.) रिक्त स्थानों की पूर्ति - प्रबन्धकारिणी समिति के रिक्त स्थानों की पूर्ति आम सभा प्रबन्धकारिणी समिति के 2/3 बहुमत द्वारा कर ली जायेगी।
(च) प्रबन्धकारिणी समिति के कर्तव्य/अधिकार
(1) संस्था के समस्त प्रकार की प्रबन्धकीय व्यवस्था करना एवं सुचारू रूप से संचालित करते रहना संस्था की समस्त प्रकार की चल-अचल सम्पत्ति का समुचित ढंग से देखभाल व संरक्षण करना तथा संस्था के समस्त कार्यों एवं आय-व्यय तथा संस्था की प्रगति का ब्यौरा संस्थापक/अध्यक्ष को हर तीन माह में देना होगा।
(2) संस्था के द्वारा सार्वागीण जन उत्थान केन्द्र एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम/मनोरंजन मेला आदि कार्यक्रमों एवं शिक्षण, मानव उत्थान स्वास्थ्य केन्द्र आदि संचालित होने पर संचालक निदेशक, प्रबन्धक, सलाहाकार आदि की नियुक्ति संस्थापक/अध्यक्ष एवं साधारण सभा द्वारा योग्यता अनुसार एवं आवश्यकतानुसार की जायेगी।
(छ) कार्यकाल - प्रबन्धकारिणी समिति का कार्यकाल 5 वर्ष का होगा।

9. प्रबन्धकारिणी समिति के पदाधिकारियों के अधिकार एवं कर्व्य
1. संस्थापक आजीवन संस्था अध्यक्ष रहेंगे।

अध्यक्ष के कर्तव्य/अधिकार

1. संस्था की बैठकों की अध्यक्षता करना।
2. संस्था की प्रगति हेतु उचित सलाह देना।
3. संस्था के लिए किये जाने वाले विकास कार्यों की स्वीकृति देना।
4. प्रबन्धकारिणी के सदस्यों के कार्यों की देख-रेख करना।
5. संस्था के लिए 5000/- रूपये तक की राशि खर्च करने का अधिकार होगा।
6. संस्था के उद्देश्यों के आधार पर शिक्षण/प्रशिक्षण केन्द्रों को संचालित करना।
7. अपनी अनुपस्थिति में अपने सामान्य अधिकार उपाध्यक्ष को देना।

उपाध्यक्षता/उपाध्यक्ष

1. अध्यक्ष के कŸार्व्य एवं नियमों को नियमित रूप से पालन करना।
2. संस्था के कार्य क्षेत्रों का विस्तार कर संस्था की प्रगति हेतु कार्य करना।
3. संस्था उद्देश्यों के आधार पर जन उत्थान हेतु कार्य करना।
4. संस्था के लिए 500/- रूपये तक की राशि खर्च करने का अधिकार होना।
5. अध्यक्ष की अनुपस्थिति में समिति की बैठकों की कार्यवाही संचालित करना।

सचिव

1. संस्था की बैठकों की तिथि व समय सम्बन्धी सूचना संस्था के सदस्यों को उचित समय पर देना।
2. सचिव के पद पर रहकर प्रभारी के रूप में कार्य करना।
3. संस्था के संपूर्ण कार्यों की देखरेख करना।
4. संस्था के समस्त रिकार्ड कागजात आदि को सुरक्षित व्यवस्थित एवं सुव्यवस्थित रखना तथा आवश्यक पत्र व्यवहार करना।
5. संस्था के आय-व्यय लेखा विवरण को संस्था की बैठकों में उपस्थित करना।
6. संस्था के खर्च आदि हेतु अपने पास 1000/- रूपये इन्ट्रेस्ट मनी के रूप में अपने पास रखना।
7. अपनी अनुपस्थिति में अपने अधिकार अध्यक्ष की स्वीकृति से उपसचिव को प्रदान करना।

उपसचिव

1. संस्था की प्रगति हेतु सचिव के कार्यों में सहयोग देना।
2. संस्था की बैठकों की तिथि व बैठक समय सम्बन्धित सूचना संस्था के सदस्यों को उचित समय पर देना।
3. संस्था के संपूर्ण कार्य क्षेत्रों का विस्तार करना।
4. सचिव की अनुपस्थिति में उनके कार्यों एवं अधिकारों का पालन करना।

कोषाध्यक्ष

1. संस्था का आय-व्यय का पूर्ण विवरण रखना।
2. राष्ट्रीयकृत बैंक या डाकखाने में संस्था का धन जमा करना।
3. संस्था के आय-व्यय लेखा विवरण तैया करना एवं उसे बैठक में प्रस्तुत करना।

संगठन सचिव

1. संस्था की प्रगति हेतु आम लोगों का संस्था में जोड़ना।
2. संस्था के विकास हेतु आवश्यक सुझाव देना।
3. संस्था के विषय में लोगों को समझाना तथा संस्था की प्रगति हेतु कार्य करना।
4. संस्था के विज्ञापन तथा साहित्यिक रूप से प्रचार-प्रसार करना।
5. संपूर्ण विश्व में जन उत्थान हेतु हर संभव कार्य करना।
6. संस्था के लिये आवश्यक साहित्य विज्ञापन तथा संस्था के प्रचार-प्रसार का कार्य करना।

ऑडिटर या लेखा निरीक्षक

1. संस्था के आय-व्यय लेखा विवरण तथा संस्था द्वारा व्यय किये गये विवरण, वाउचर्स को ऑडिट रिपोर्ट प्रस्तुत करना।
2. संस्था के लेखा-जोखा का निरीक्षण करना तथा समय-समय पर उसकी जांच करना।
3. संस्था द्वारा संचालित शिक्षण/प्रशिक्षण केन्द्रों का वर्ष में दो बार ऑडिट कर रिपोर्ट संस्था मुख्यालय में प्रस्तुत करना।

प्रचार मंत्री

1. संस्था की एवं जन उत्थान हेतु सदैव कार्य करना।
2. संस्था का प्रचार-प्रसार करना।

संस्था का कोष

1. संस्था का कोष किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में रखा जायेगा। संस्था के कार्यों पर खर्च करने के लिये संस्था के कोष से राशि निकालने के लिए संस्थापक/अध्यक्ष एवं कोषाध्यक्ष या अध्यक्ष, सचिव में से किन्हीं दो पदाधिकारियों के संयुक्त हस्ताक्षरों द्वारा बैंक से राशि निकाली जा सकेगी। अध्यक्ष, सचिव, कोषाध्यक्ष के नमूने के हस्ताक्षर, बैंक को प्रदान किये जायेंगे।
2. संस्था के मुख्यालय से अन्य संस्था की शाखाओं में कोष की आवश्यकता पड़ने पर संस्था का कोष किसी राष्ट्रीयकृत बैंक में रखा जायेगा। संस्था के खर्च के लिए संस्था के कोष की राशि निकालने के लिए संस्थापक/अध्यक्ष, सचिव अथवा कोषाध्यक्ष, अध्यक्ष किन्हीं दो व्यक्तियों के द्वारा संस्था की शाखा क्षेत्र बैंक में लेन-देन किया जा सकता है।

संस्था के अभिलेख

संस्था के निम्नलिखित अभिलेख होंगे -
1. कार्यवाही रजिस्टर
2. सदस्यता सम्बन्धी रजिस्टर
3. बैठक सूचना रजिस्टर
4. स्टॉक रजिस्टर
< 5. कैश बुक
6. आवक-जावक रजिस्टर
7. लेजर
8. रसीद बुक
9. सम्पत्ति रजिस्टर
10. शिक्षण/प्रशिक्षण केन्द्र विवरण रजिस्टर
11. छात्र/छात्रा पंजिका रजिस्टर
12. स्टाफ रजिस्टर

संस्था की चल अचल सम्पत्ति का स्वामित्व संस्था को होगा जिसका संपूर्ण अधिकार नियमानुसार स्टाक रजिस्टर में लिखा जायेगा।

7 अदालत सम्बन्धी कार्यवाही का संचालन
संस्था के साथ यदि कोई विवाद या अदालती कार्यवाही हो तो अध्यक्ष, सचिव या उपाध्यक्ष के द्वारा अदालती कार्यवाही का संचालन किया जायेगा विवादों के सम्बन्ध में संस्था को आवश्यक कार्यवाही हेतु पूर्ण अधिकार होगा कि वह विवादों के निस्तारण हेतु उचित व्यवस्था करें तथा अदालती कार्यवाही या किसी भी प्रकार का वाद-विवाद का न्याय क्षेत्र जनपद रूद्रप्रयाग अथवा देहरादून में रहेगा।

नियमावली में संशोधन
संस्था की नियमावली में आवश्यकतानुसार संस्थापक/अध्यक्ष की अनुमति से संस्था की नियमावली में संशोधन साधारण सभा के 2/3 सदस्यों की सहमति से किया जा सकेगा। यदि किन्हीं विशेष कारणों या परिस्थितियों में नियमावली में संशोधन किया जाता है तो नियमावली में संशोधन करने के पश्चात् संशोधित प्रतिलिपि पूर्ण विवरण सहित सूचनार्थ रजिस्ट्रार सोसाईटीज एक्ट (उ0्रप्र0) उत्तरांचल तथा क्षेत्रीय कार्यालय उपनिबन्धक फर्म्स, सोसाइटीज एण्ड चिट्स रूद्रप्रयाग/देहरादून को भेजी जायेगी।

संस्था का विघटन
संस्था का विघटन की कार्यवाही साधारण सभा की पुष्टि तथा साधारण सभा के 2/3 सदस्यों की सहमति से हो सकेगी।